राजव्यवस्था (Polity & Governance) : आपातकालीन प्रावधान

आपातकालीन प्रावधान

आपातकालीन प्रावधान संविधान के भाग XVIII (अनुच्छेद 352–360) में दिए गए हैं, ताकि युद्ध/बाहरी आक्रमण/आंतरिक संकट जैसी असाधारण स्थितियों में शासन-तंत्र को विशेष शक्तियाँ मिल सकें। राष्ट्रीय आपातकाल अनुच्छेद 352 के तहत तब घोषित किया जा सकता है जब भारत (या उसके किसी भाग) की सुरक्षा “war, external aggression, or armed rebellion” से खतरे में हो। आपातकाल के दौरान संघीय ढाँचा अधिक एकात्मक हो जाता है और मौलिक अधिकारों पर प्रभाव/प्रतिबंध की व्यवस्था अनुच्छेद 358 और 359 में दी गई है।

10 MCQs

1. आपातकालीन प्रावधानों को संविधान में क्यों शामिल किया गया?
A. सामान्य शासन को समाप्त करने के लिए
B. केंद्र को स्थायी रूप से शक्तिशाली बनाने के लिए
C. असाधारण परिस्थितियों में संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा के लिए
D. राज्यों की शक्तियाँ समाप्त करने के लिए
उत्तर: C
व्याख्या: आपातकालीन प्रावधानों का उद्देश्य संकट की स्थिति में संविधान और राष्ट्र की सुरक्षा करना है, न कि सामान्य शासन को बदलना।

2. आपातकाल के दौरान संघीय ढाँचे की प्रकृति में क्या परिवर्तन आता है?
A. अधिक संघात्मक हो जाता है
B. अधिक एकात्मक हो जाता है
C. पूर्णतः समाप्त हो जाता है
D. न्यायपालिका के अधीन हो जाता है
उत्तर: B
व्याख्या: आपातकाल में केंद्र की शक्तियाँ बढ़ जाती हैं, जिससे संघीय ढाँचा अस्थायी रूप से एकात्मक रूप ले लेता है।

3. कथन 1: आपातकाल केवल बाहरी आक्रमण की स्थिति में लगाया जा सकता है।
कथन 2: आपातकाल संविधान में वर्णित विशेष परिस्थितियों में लगाया जाता है।
A. केवल कथन 1 सही है
B. केवल कथन 2 सही है
C. दोनों सही हैं
D. दोनों गलत हैं
उत्तर: B
व्याख्या: आपातकाल युद्ध, बाहरी आक्रमण या गंभीर आंतरिक संकट (armed rebellion) जैसी परिस्थितियों में लगाया जा सकता है।

4. आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों की स्थिति क्या होती है?
A. सभी मौलिक अधिकार समाप्त हो जाते हैं
B. मौलिक अधिकारों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता
C. कुछ मौलिक अधिकारों पर अस्थायी प्रतिबंध लग सकते हैं
D. केवल न्यायपालिका के अधिकार समाप्त होते हैं
उत्तर: C
व्याख्या: राष्ट्रीय आपातकाल में मौलिक अधिकारों पर प्रभाव/स्थगन की व्यवस्था अनुच्छेद 358 और 359 में दी गई है, इसलिए कुछ अधिकारों पर अस्थायी प्रतिबंध संभव है।

5. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
1. आपातकाल में केंद्र को राज्यों पर अधिक नियंत्रण मिलता है।
2. आपातकाल स्थायी व्यवस्था है।
3. आपातकाल के दौरान संसद की भूमिका समाप्त हो जाती है।
सही उत्तर चुनिए—
A. केवल 1
B. केवल 1 और 2
C. केवल 2 और 3
D. 1, 2 और 3
उत्तर: A
व्याख्या: आपातकाल अस्थायी होता है और संसद की भूमिका बनी रहती है, इसलिए कथन 2 और 3 गलत हैं।

6. अभिकथन: आपातकालीन शक्तियों पर संवैधानिक नियंत्रण आवश्यक है।
कारण: असीमित आपातकालीन शक्ति लोकतंत्र को कमजोर कर सकती है।
A. दोनों सही हैं और कारण सही व्याख्या करता है
B. दोनों सही हैं, पर कारण व्याख्या नहीं करता
C. अभिकथन सही, कारण गलत
D. अभिकथन गलत, कारण सही
उत्तर: A
व्याख्या: आपातकाल संबंधी घोषणाओं/प्रावधानों पर संसदीय स्वीकृति तथा न्यायिक समीक्षा (जैसे अनुच्छेद 356 के संदर्भ में) जैसी व्यवस्थाएँ दुरुपयोग रोकने में सहायक हैं।

7. यदि आपातकाल लंबे समय तक जारी रहे, तो सबसे संभावित खतरा क्या होगा?
A. प्रशासन अधिक कुशल हो जाएगा
B. लोकतांत्रिक अधिकार कमजोर हो सकते हैं
C. न्यायपालिका मजबूत हो जाएगी
D. संघीय व्यवस्था और सशक्त हो जाएगी
उत्तर: B
व्याख्या: लंबे समय तक आपातकाल रहने से नागरिक स्वतंत्रताओं/लोकतांत्रिक अधिकारों पर दबाव बढ़ सकता है।

8. आपातकाल में न्यायपालिका की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण हो जाती है?
A. क्योंकि वह शासन चलाती है
B. क्योंकि वह आपातकाल की आवश्यकता/वैधता की संवैधानिक जाँच कर सकती है
C. क्योंकि वह संसद को नियंत्रित करती है
D. क्योंकि वह चुनाव कराती है
उत्तर: B
व्याख्या: न्यायिक समीक्षा के माध्यम से अदालतें यह परख सकती हैं कि असाधारण शक्तियाँ संवैधानिक सीमाओं के भीतर प्रयोग हो रही हैं या नहीं।

9. आपातकालीन प्रावधानों का राज्यों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
A. राज्यों की स्वायत्तता अस्थायी रूप से कम हो सकती है
B. राज्यों की शक्तियाँ स्थायी रूप से समाप्त हो जाती हैं
C. राज्यों की भूमिका बढ़ जाती है
D. राज्यों का संविधान बदल जाता है
उत्तर: A
व्याख्या: आपातकाल में केंद्र की शक्तियाँ बढ़ने से संघीय संतुलन अस्थायी रूप से केंद्र की ओर झुक सकता है।

10. आपातकालीन प्रावधानों के अध्ययन से क्या समझ विकसित होती है?
A. आपातकाल लोकतंत्र का विकल्प है
B. आपातकाल केवल प्रशासनिक व्यवस्था है
C. संकट और स्वतंत्रता के बीच संतुलन आवश्यक है
D. आपातकाल का कोई संवैधानिक महत्व नहीं

उत्तर: C
व्याख्या: भाग XVIII दिखाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा/संवैधानिक स्थिरता और नागरिक स्वतंत्रताओं—दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

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