अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें 5000 डॉलर प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर के ऊपर स्थिर बनी हुई हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार स्पॉट गोल्ड लगभग 5008 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर रहा, जबकि गोल्ड फ्यूचर्स में हल्की बढ़त देखी गई।
हालांकि कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया, लेकिन बाजार में अनिश्चितता के कारण निवेशकों की नजर लगातार इस पर बनी हुई है।
ईरान युद्ध का बाजार पर प्रभाव –
मध्य पूर्व में जारी ईरान से जुड़ा संघर्ष वैश्विक बाजारों पर बड़ा प्रभाव डाल रहा है। इस तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा है।
आमतौर पर ऐसे भू-राजनीतिक संकट में सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार बढ़ती महंगाई और मजबूत डॉलर ने सोने की तेजी को सीमित किया है।
केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर टिकी नजर –
इस समय निवेशकों का फोकस प्रमुख केंद्रीय बैंकों, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व, के आगामी फैसलों पर है। ब्याज दरों में बदलाव की संभावना सोने की कीमतों को सीधे प्रभावित करती है।
अगर केंद्रीय बैंक सख्त रुख अपनाते हैं और ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो सोने की मांग कमजोर पड़ सकती है, क्योंकि यह बिना ब्याज वाला निवेश है।
महंगाई और डॉलर की भूमिका –
ईरान युद्ध के चलते ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई का दबाव बढ़ रहा है। इससे निवेशकों को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक दरों में कटौती करने से बच सकते हैं। 3
इसके साथ ही मजबूत अमेरिकी डॉलर भी सोने की कीमतों पर दबाव बना रहा है, जिससे इसकी तेजी सीमित हो रही है।
आगे क्या रह सकता है रुख –
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने की दिशा पूरी तरह से दो प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगी—पहला, ईरान युद्ध की स्थिति और दूसरा, केंद्रीय बैंकों की नीतियां।
यदि भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है, तो सोना फिर से तेज़ी पकड़ सकता है। वहीं, अगर ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं, तो कीमतों में दबाव देखने को मिल सकता है।