संसदीय समितियाँ
संसदीय समितियाँ संसद के कार्य को अधिक प्रभावी, तकनीकी और गहन बनाने का माध्यम हैं। चूँकि संसद के पास सीमित समय होता है और विधायी व प्रशासनिक कार्य अत्यंत व्यापक होते हैं, इसलिए विस्तृत जाँच, विश्लेषण और निगरानी का कार्य समितियों के माध्यम से किया जाता है। ये समितियाँ विधेयकों की समीक्षा, बजट और व्यय की जाँच, मंत्रालयों के कामकाज की निगरानी तथा नीतिगत सुझाव देने का कार्य करती हैं। संसदीय समितियाँ दलीय राजनीति से अपेक्षाकृत ऊपर उठकर कार्य करती हैं, जिससे निर्णय अधिक वस्तुनिष्ठ और संतुलित बनते हैं। इस प्रकार समितियाँ संसद और कार्यपालिका के बीच एक प्रभावी निगरानी तंत्र के रूप में कार्य करती हैं और लोकतांत्रिक जवाबदेही को मजबूत करती हैं।
10 MCQs
1. संसदीय समितियों का मुख्य उद्देश्य क्या है?
A. संसद का स्थान लेना
B. सरकार को कमजोर करना
C. संसदीय कार्य को अधिक प्रभावी और विस्तृत बनाना
D. न्यायपालिका का कार्य करना
उत्तर: C
व्याख्या: संसदीय समितियाँ सीमित समय में गहन जाँच और विश्लेषण करके संसद की कार्यक्षमता बढ़ाती हैं।
2. संसदीय समितियों को लोकतंत्र के लिए क्यों आवश्यक माना जाता है?
A. क्योंकि वे कानून बनाती हैं
B. क्योंकि वे कार्यपालिका पर निगरानी रखती हैं
C. क्योंकि वे न्यायिक निर्णय देती हैं
D. क्योंकि वे राष्ट्रपति को सलाह देती हैं
उत्तर: B
व्याख्या: समितियाँ मंत्रालयों और नीतियों की समीक्षा कर कार्यपालिका को जवाबदेह बनाती हैं।
3. कथन 1: संसदीय समितियाँ संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से बन सकती हैं।
कथन 2: संसदीय समितियाँ केवल लोकसभा तक सीमित होती हैं।
A. केवल कथन 1 सही है
B. केवल कथन 2 सही है
C. दोनों सही हैं
D. दोनों गलत हैं
उत्तर: A
व्याख्या: कई समितियाँ द्विसदनीय होती हैं, जिनमें लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सदस्य होते हैं।
4. स्थायी संसदीय समितियों का महत्व क्यों अधिक है?
A. क्योंकि वे अस्थायी होती हैं
B. क्योंकि वे निरंतर कार्य और निगरानी करती हैं
C. क्योंकि वे केवल एक विधेयक पर काम करती हैं
D. क्योंकि वे राष्ट्रपति द्वारा गठित होती हैं
उत्तर: B
व्याख्या: स्थायी समितियाँ नियमित रूप से मंत्रालयों और विभागों की समीक्षा करती हैं।
5. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
संसदीय समितियाँ विधेयकों की गहन जाँच करती हैं।
संसदीय समितियों की सिफारिशें कानूनी रूप से बाध्यकारी होती हैं।
संसदीय समितियाँ नीतिगत सुधारों का सुझाव देती हैं।
सही उत्तर चुनिए—
A. केवल 1
B. केवल 1 और 3
C. केवल 2 और 3
D. 1, 2 और 3
उत्तर: B
व्याख्या: समितियों की सिफारिशें बाध्यकारी नहीं होतीं, लेकिन उनका राजनीतिक और नैतिक महत्व होता है।
6. अभिकथन: संसदीय समितियाँ कार्यपालिका की शक्ति पर नियंत्रण रखती हैं।
कारण: वे प्रशासनिक कार्यों और व्यय की समीक्षा करती हैं।
A. दोनों सही हैं और कारण सही व्याख्या करता है
B. दोनों सही हैं, पर कारण व्याख्या नहीं करता
C. अभिकथन सही, कारण गलत
D. अभिकथन गलत, कारण सही
उत्तर: A
व्याख्या: निगरानी और समीक्षा के माध्यम से समितियाँ सत्ता संतुलन बनाए रखती हैं।
7. यदि संसदीय समितियाँ प्रभावी रूप से कार्य न करें, तो सबसे संभावित परिणाम क्या होगा?
A. संसद अधिक शक्तिशाली हो जाएगी
B. कार्यपालिका पर निगरानी कमजोर हो जाएगी
C. न्यायपालिका की भूमिका समाप्त हो जाएगी
D. राष्ट्रपति की शक्ति बढ़ जाएगी
उत्तर: B
व्याख्या: समितियों के कमजोर होने से प्रशासनिक जवाबदेही कम हो सकती है।
8. संसदीय समितियों में दलीय राजनीति अपेक्षाकृत कम क्यों होती है?
A. क्योंकि विपक्ष को शामिल नहीं किया जाता
B. क्योंकि कार्य तकनीकी और विषय-आधारित होता है
C. क्योंकि निर्णय गुप्त होते हैं
D. क्योंकि राष्ट्रपति हस्तक्षेप करता है
उत्तर: B
व्याख्या: विस्तृत और तकनीकी चर्चा दलीय टकराव को कम करती है।
9. संसदीय समितियाँ विधायी प्रक्रिया को कैसे बेहतर बनाती हैं?
A. विधेयकों को रोककर
B. विधेयकों की गहन समीक्षा और सुधार सुझाकर
C. सरकार के निर्णय को अस्वीकार करके
D. न्यायिक समीक्षा करके
उत्तर: B
व्याख्या: समितियों की समीक्षा से कानून अधिक व्यावहारिक और संतुलित बनते हैं।
10. संसदीय समितियों के अध्ययन से क्या समझ विकसित होती है?
A. संसद केवल औपचारिक संस्था है
B. समितियाँ लोकतांत्रिक जवाबदेही का महत्वपूर्ण उपकरण हैं
C. समितियों का कोई वास्तविक महत्व नहीं
D. समितियाँ कार्यपालिका से ऊपर हैं
उत्तर: B
व्याख्या: संसदीय समितियाँ लोकतंत्र में निगरानी, विशेषज्ञता और संतुलन का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।