सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act, 2005) :
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 भारतीय लोकतंत्र को अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनाने के उद्देश्य से लागू किया गया एक महत्वपूर्ण कानून है। यह अधिनियम 12 अक्टूबर 2005 से पूरे भारत में लागू हुआ। इस कानून के अंतर्गत प्रत्येक भारतीय नागरिक को सरकारी विभागों, कार्यालयों और सार्वजनिक प्राधिकरणों से सूचना प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है।
RTI अधिनियम का मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाना और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है। इसके तहत कोई भी नागरिक लिखित या ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से सूचना मांग सकता है। सामान्यतः सूचना 30 दिनों के भीतर प्रदान की जाती है, जबकि जीवन और स्वतंत्रता से संबंधित मामलों में 48 घंटे के भीतर सूचना देना अनिवार्य है।
इस अधिनियम के अंतर्गत केंद्रीय सूचना आयोग और राज्य सूचना आयोग की स्थापना की गई है, जो सूचना न मिलने या गलत सूचना दिए जाने की स्थिति में अपील की सुनवाई करते हैं। हालांकि राष्ट्रीय सुरक्षा, गोपनीय दस्तावेज और निजी जानकारी जैसी कुछ सूचनाएँ RTI के दायरे से बाहर रखी गई हैं।
सूचना का अधिकार अधिनियम नागरिकों को सशक्त बनाता है और लोकतंत्र में जनभागीदारी को मजबूत करता है। होमगार्ड जैसे बलों के लिए भी इस कानून की बुनियादी जानकारी अत्यंत आवश्यक है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) :
प्रश्न 1 : सूचना का अधिकार अधिनियम पूरे भारत में कब लागू हुआ?
A. 2004
B. 2005
C. 2006
D. 2007
प्रश्न 2 : RTI अधिनियम का मुख्य उद्देश्य क्या है?
A. कर व्यवस्था सुधारना
B. प्रशासनिक नियंत्रण बढ़ाना
C. पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करना
D. न्यायिक प्रक्रिया तेज करना
प्रश्न 3 : सामान्य मामलों में सूचना कितने दिनों के भीतर दी जानी चाहिए?
A. 15 दिन
B. 20 दिन
C. 30 दिन
D. 45 दिन
प्रश्न 4 : सूचना न मिलने की स्थिति में अपील किसके पास की जाती है?
A. जिला मजिस्ट्रेट
B. उच्च न्यायालय
C. सूचना आयोग
D. संसद
प्रश्न 5 : निम्न में से कौन-सी सूचना RTI के अंतर्गत नहीं आती?
A. सरकारी खर्च का विवरण
B. विकास योजनाओं की जानकारी
C. राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय सूचना
D. सरकारी आदेश की प्रति
उत्तर (Answer) :
1 — B
2 — C
3 — C
4 — C
5 — C