सामाजिक न्याय एवं आरक्षण व्यवस्था :
सामाजिक न्याय का अर्थ समाज के सभी वर्गों को समान अवसर, अधिकार और सम्मान प्रदान करना है। भारतीय संविधान ने ऐतिहासिक रूप से वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाने के लिए सामाजिक न्याय और आरक्षण व्यवस्था को अपनाया। संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 समानता के अधिकार की गारंटी देते हैं, जबकि अनुच्छेद 15(4) और 16(4) राज्य को पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान करने की शक्ति प्रदान करते हैं।
भारत में वर्तमान में अनुसूचित जातियों के लिए लगभग 15%, अनुसूचित जनजातियों के लिए 7.5% और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27% आरक्षण का प्रावधान है। वर्ष 2019 में 103वें संविधान संशोधन द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10% आरक्षण जोड़ा गया। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, आरक्षण के कारण उच्च शिक्षा और सरकारी सेवाओं में वंचित वर्गों की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
सामाजिक न्याय एवं आरक्षण का महत्व:
• सामाजिक और शैक्षिक असमानता को कम करना
• संवैधानिक समानता के अधिकार को लागू करना
• वंचित वर्गों को प्रतिनिधित्व देना
• लोकतंत्र और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करना
• समतामूलक समाज का निर्माण
इस प्रकार सामाजिक न्याय और आरक्षण व्यवस्था संविधान के समानता सिद्धांत को व्यवहार में लागू करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) :
प्रश्न 1 : समानता का अधिकार भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद से संबंधित है?
A. अनुच्छेद 12
B. अनुच्छेद 14
C. अनुच्छेद 19
D. अनुच्छेद 21
प्रश्न 2 : अनुच्छेद 16(4) किससे संबंधित है?
A. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
B. शिक्षा का अधिकार
C. पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण
D. धार्मिक स्वतंत्रता
प्रश्न 3 : वर्तमान में OBC के लिए आरक्षण प्रतिशत कितना है?
A. 15%
B. 7.5%
C. 27%
D. 10%
प्रश्न 4 : आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए आरक्षण किस संशोधन द्वारा जोड़ा गया?
A. 42वाँ संशोधन
B. 44वाँ संशोधन
C. 73वाँ संशोधन
D. 103वाँ संशोधन
प्रश्न 5 : आरक्षण व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य क्या है?
A. किसी वर्ग को स्थायी लाभ देना
B. केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व
C. समानता को व्यवहार में लागू करना
D. प्रशासनिक नियंत्रण बढ़ाना
उत्तर (Answer) :
1 — B
2 — C
3 — C
4 — D
5 — C