औपनिवेशिक शासन और आदिवासी समाज
औपनिवेशिक शासन के विस्तार के साथ आदिवासी समाज का जीवन गहरे रूप से प्रभावित हुआ। आदिवासी समुदाय जंगलों, पहाड़ों और दुर्गम क्षेत्रों में रहते थे और उनका जीवन शिकार, वन उपज, झूम खेती तथा सामुदायिक परंपराओं पर आधारित था। औपनिवेशिक शासन ने जंगलों को राज्य की संपत्ति घोषित किया, वन कानून बनाए और आदिवासियों की परंपरागत गतिविधियों पर नियंत्रण लगाया। इससे आदिवासियों की आजीविका, सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। भूमि की जब्ती, कर वसूली, ठेकेदारों और साहूकारों का हस्तक्षेप तथा जबरन श्रम जैसी नीतियों ने आदिवासी समाज को असुरक्षित बना दिया। इन परिस्थितियों के विरुद्ध आदिवासियों ने कई स्थानों पर विरोध और आंदोलन किए। इस काल की जानकारी हमें सरकारी रिपोर्टों, वन कानूनों, यात्रियों के विवरणों और आदिवासी आंदोलनों के वर्णनों से प्राप्त होती है।
10 MCQs
1. आदिवासी समाज की जीवन-शैली का मुख्य आधार क्या था?
A. उद्योग
B. व्यापार
C. वन और प्राकृतिक संसाधन
D. नगर जीवन
उत्तर: C
व्याख्या: आदिवासी समाज जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर था, जिससे उनकी आजीविका और संस्कृति जुड़ी थी।
2. औपनिवेशिक शासन ने जंगलों पर नियंत्रण क्यों स्थापित किया?
A. पर्यावरण संरक्षण के लिए
B. धार्मिक कारणों से
C. राजस्व और व्यापारिक हितों के लिए
D. आदिवासियों की सहायता के लिए
उत्तर: C
व्याख्या: जंगलों से लकड़ी, राजस्व और संसाधन प्राप्त करना औपनिवेशिक शासन का मुख्य उद्देश्य था।
3. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
कथन