प्रधान मंत्री उज्ज्वला योजना : प्रधान मंत्री उज्ज्वला योजना में हुआ बड़ा बदलाव

केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत मिलने वाली एलपीजी सब्सिडी को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने योजना के लाभार्थियों के लिए रियायती एलपीजी सिलेंडरों की संख्या में कटौती कर दी है। अब उज्ज्वला योजना से जुड़े परिवारों को साल में केवल चार एलपीजी रिफिल पर ही 300 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी मिलेगी। इससे पहले लाभार्थियों को नौ सिलेंडरों तक सब्सिडी का लाभ दिया जाता था। सरकार के इस फैसले का असर देशभर के करोड़ों गरीब परिवारों पर पड़ने की संभावना है।

सरकार ने बदले उज्ज्वला योजना के नियम –

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, उज्ज्वला योजना के तहत अब केवल पहले चार एलपीजी रिफिल पर ही डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से 300 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी दी जाएगी। हालांकि प्रति सिलेंडर मिलने वाली सब्सिडी की राशि में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार का कहना है कि अधिकांश उज्ज्वला परिवार सालाना औसतन चार सिलेंडर ही इस्तेमाल करते हैं, इसलिए सब्सिडी को वास्तविक खपत के अनुरूप बनाया गया है।

10.5 करोड़ से अधिक परिवारों को मिला लाभ –

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत वर्ष 2016 में की गई थी। इस योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों, विशेषकर महिलाओं को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक देशभर में 10.5 करोड़ से अधिक मुफ्त एलपीजी कनेक्शन वितरित किए जा चुके हैं। योजना ने ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

52 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी दे चुकी है सरकार –

सरकार ने उज्ज्वला लाभार्थियों को राहत देने के लिए मई 2022 में एलपीजी सिलेंडर पर 200 रुपये की सब्सिडी शुरू की थी, जिसे अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 300 रुपये प्रति सिलेंडर कर दिया गया था। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार अब तक एलपीजी सब्सिडी के रूप में करीब 52,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती रही है।

कितना कम होगा लाभार्थियों का फायदा? –

.पहले लाभार्थियों को नौ सिलेंडरों तक 300 रुपये की सब्सिडी मिलती थी, जिससे उन्हें सालाना 2,700 रुपये तक की सहायता प्राप्त होती थी। नए नियम लागू होने के बाद अधिकतम वार्षिक सहायता घटकर 1,200 रुपये रह जाएगी। इसका मतलब है कि प्रत्येक परिवार को सालाना 1,500 रुपये कम सब्सिडी मिलेगी। यह बदलाव ऐसे समय में किया गया है जब घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी गई है।

सरकार ने बताई कटौती की वजह –

सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी और ऊर्जा कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों के कारण तेल विपणन कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ा है। सरकार का तर्क है कि संशोधित सब्सिडी ढांचा वित्तीय बोझ कम करने में मदद करेगा, जबकि जरूरतमंद परिवारों को आवश्यक सहायता मिलती रहेगी।

गरीब परिवारों के बजट पर बढ़ सकता है दबाव –

विशेषज्ञों का मानना है कि सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या कम होने से उन परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है, जिनकी एलपीजी खपत औसत से अधिक है। हालांकि सरकार का दावा है कि अधिकांश लाभार्थियों की वार्षिक खपत चार सिलेंडरों के आसपास ही रहती है, लेकिन ग्रामीण और बड़े परिवारों के लिए यह फैसला चिंता का कारण बन सकता है। आने वाले समय में इस बदलाव का वास्तविक प्रभाव उपभोक्ताओं की गैस खपत और घरेलू बजट पर साफ दिखाई देगा।

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