Hindi Topic 1: अलंकार और समास
हिंदी व्याकरण में अलंकार का अर्थ ‘आभूषण’ है, जो काव्य की शोभा बढ़ाते हैं। अलंकार के मुख्य प्रकार शब्दालंकार (अनुप्रास, यमक, श्लेष आदि) और अर्थालंकार (उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति आदि) हैं। यह काव्य में सौंदर्य, रस और आकर्षण उत्पन्न करते हैं, जिससे रचना अधिक प्रभावशाली हो जाती है।
अलंकार के प्रमुख भेद।
अलंकार को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा जा सकता है:
शब्दालंकार: जहाँ शब्द के कारण चमत्कार उत्पन्न हो, जैसे- अनुप्रास (वर्णों की आवृत्ति), यमक, श्लेष।
अर्थालंकार: जहाँ अर्थ के कारण काव्य में सौंदर्य आए, जैसे- उपमा (तुलना), रूपक (अभेद आरोप), उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति।
उभयालंकार: जहाँ शब्द और अर्थ दोनों में अलंकार हो।
1. अनुप्रास अलंकार:
अनुप्रास अलंकार वह अलंकार है जिसमें किसी कविता या गीत में एक ही ध्वनि या अक्षर कई बार दोहराया जाता है। इससे शब्दों में एक तरह की लय और मिठास आती है और कविता या गीत और सुंदर लगता है।
उदाहरण: “चाँद चमकता चाँदनी रात में।”
(यहां ‘चाँद’ और ‘चमकता’ में ‘च’ ध्वनि की पुनरावृत्ति की गई है।)
“काले काले काजल की काजल से।”
(यहां ‘काले’ और ‘काजल’ में ‘क’ ध्वनि की पुनरावृत्ति की गई है।)
2. रूपक अलंकार
जब उपमेय और उपमान में कोई भेद न दिखाई दे, अर्थात उपमेय और उपमान को एक जैसा प्रस्तुत किया जाए, वहाँ रूपक अलंकार होता है।
उदाहरण : “कमल के समान मुख, और चाँद जैसी हँसी।” इस अलंकार में :
उपमेय को उपमान का रूप दिया जाता है।
वाचक शब्द का लोप होता है।
उपमेय का भी वर्णन होता है।
3. उत्प्रेक्षा अलंकार
जब उपमान की अनुपस्थिति में उपमेय को ही उपमान मान लिया जाता है, अथवा जहाँ अप्रस्तुत को प्रस्तुत मान लिया जाए, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।
उदाहरण : “सखि सोहत गोपाल के, उर गुंजन की माल, बाहर सोहत मनु पिये, दावानल की ज्वाल।”
4. अतिश्योक्ति अलंकार
जब किसी व्यक्ति या वस्तु का वर्णन करते समय सामान्य सीमाओं या मर्यादाओं का उल्लंघन हो जाता है, तो उसे अतिश्योक्ति अलंकार कहते हैं। इसमें वस्तु या व्यक्ति की विशेषताओं को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता है।
उदाहरण : हनुमान की पूंछ में लगन न पायी आगि।
सगरी लंका जल गई, गये निसाचर भागि।
5. द्रष्टान्त अलंकार
जब दो वाक्यों में बिम्ब-प्रतिबिम्ब का भाव होता है, तब वहाँ दृष्टान्त अलंकार होता है। इस अलंकार में उपमेय रूप में कही गई बात से मिलती-जुलती बात उपमान रूप में दूसरे वाक्य में होती है। यह उभयालंकार का भी एक प्रकार है।
उदाहरण : “जैसे एक म्यान में दो तलवारें नहीं रह सकतीं, वैसे ही एक दिल में दो सच्चे प्रेम नहीं समा सकते।
जैसे एक आकाश में दो सूरज नहीं चमक सकते, वैसे ही एक मन में दो विपरीत विचार नहीं टिक सकते।”
6. संदेह अलंकार
जब उपमेय और उपमान में समानता देखकर यह तय नहीं हो पाता कि उपमान वास्तव में उपमेय है या नहीं, तब संदेह अलंकार होता है। अर्थात, जब किसी व्यक्ति या वस्तु को देखकर संशय बना रहे, तो वहाँ संदेह अलंकार होता है। यह उभयालंकार का भी एक प्रकार है। इस अलंकार में :
विषय का अनिश्चित ज्ञान होता है।
यह अनिश्चित समानता पर आधारित होता है।
अनिश्चय का चमत्कारपूर्ण वर्णन होता है।
संधि
संधि की परिभाषा : दो शब्दों या वर्णों के मिलने से जब उनके उच्चारण या ध्वनि में परिवर्तन (विकार) होता है, तो उसे संधि कहते हैं। यह वर्णों का मेल है, शब्दों का नहीं।
संधि के भेद (Types of Sandhi): संधि के मुख्य रूप से तीन भेद होते हैं: स्वर संधि (Swar Sandhi), व्यंजन संधि (Vyanjan Sandhi), विसर्ग संधि (Visarga Sandhi)
दीर्घ संधि के उदाहरण
धर्म + अर्थ = धर्मार्थ
रवि + इंद्र = रविन्द्र
मुनि +इंद्र = मुनींद्र
विधु + उदय = विधूदय
भानु + उदय = भानूदय
पुस्तक + आलय = पुस्तकालय
गुण संधि के उदाहरण
नर + इंद्र + नरेंद्र
सुर + इन्द्र = सुरेन्द्र
ज्ञान + उपदेश = ज्ञानोपदेश
भारत + इंदु = भारतेन्दु
देव + ऋषि = देवर्षि
सर्व + ईक्षण = सर्वेक्षण
वृधि संधि के उदाहरण
मत + एकता = मतैकता
एक + एक =एकैक
धन + एषणा = धनैषणा
सदा + एव = सदैव
महा + ओज = महौज
यण संधि के उदाहरण
इति + आदि = इत्यादि
परी + आवरण = पर्यावरण
अनु + अय = अन्वय
सु + आगत = स्वागत
अभी + आगत = अभ्यागत
अयादि संधि के उदाहरण
ने + अन = नयन
नौ + इक = नाविक
भो + अन = भवन
पो + इत्र = पवित्र
भौ + उक = भावुक