भारत में पंचायती राज प्रणाली (Panchayati Raj System in India) :
भारत में पंचायती राज प्रणाली ग्रामीण स्वशासन की संवैधानिक व्यवस्था है। इसे संवैधानिक दर्जा 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा दिया गया, जो 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ। इस संशोधन के अंतर्गत संविधान में भाग IX और अनुसूची 11 जोड़ी गई। पंचायती राज की त्रि-स्तरीय संरचना में ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला पंचायत शामिल हैं।
भारत में वर्तमान में लगभग 2.6 लाख से अधिक ग्राम पंचायतें कार्यरत हैं। पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल 5 वर्ष निर्धारित किया गया है। अनुच्छेद 243D के अनुसार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान है। महिलाओं के लिए कम से कम 33% आरक्षण अनिवार्य है, जबकि कई राज्यों में यह बढ़ाकर 50% कर दिया गया है।
अनुच्छेद 243G के अंतर्गत पंचायतों को 29 विषयों पर कार्य करने का अधिकार दिया गया है, जिनमें कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पेयजल और गरीबी उन्मूलन शामिल हैं। पंचायती राज से ग्रामीण विकास, जनभागीदारी और लोकतंत्र को जमीनी स्तर पर मजबूती मिली है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में ग्रामीण प्रशासन और योजनाओं के क्रियान्वयन में पंचायतों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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