भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम एवं ISRO :
भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। इसकी शुरुआत 1960 के दशक में हुई, जब देश ने अंतरिक्ष अनुसंधान को विकास से जोड़ने का लक्ष्य रखा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की स्थापना वर्ष 1969 में की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष तकनीक का शांतिपूर्ण उपयोग करना है।
ISRO ने उपग्रह प्रक्षेपण, रिमोट सेंसिंग, संचार, मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। INSAT और IRS जैसे उपग्रह भारत की संचार व्यवस्था, टेलीविजन, इंटरनेट और कृषि निगरानी में सहायक हैं। PSLV और GSLV जैसे प्रक्षेपण यान भारत की आत्मनिर्भर अंतरिक्ष क्षमता को दर्शाते हैं।
भारत ने चंद्रयान और मंगलयान जैसे मिशनों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। अंतरिक्ष तकनीक का उपयोग ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा में भी किया जा रहा है। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम कम लागत और उच्च सफलता दर के लिए विश्वभर में सराहा जाता है। इस प्रकार ISRO देश के वैज्ञानिक, आर्थिक और रणनीतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) :
प्रश्न 1 : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
A. 1962
B. 1965
C. 1969
D. 1972
प्रश्न 2 : भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या है?
A. केवल सैन्य उपयोग
B. अंतरिक्ष का शांतिपूर्ण उपयोग
C. केवल अंतरराष्ट्रीय मिशन
D. केवल व्यावसायिक लाभ
प्रश्न 3 : INSAT और IRS उपग्रह मुख्यतः किस क्षेत्र में सहायक हैं?
A. खनन
B. संचार और निगरानी
C. परिवहन
D. पर्यटन
प्रश्न 4 : PSLV और GSLV किससे संबंधित हैं?
A. उपग्रह
B. अंतरिक्ष स्टेशन
C. प्रक्षेपण यान
D. रॉकेट ईंधन
प्रश्न 5 : भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की विशेषता क्या है?
A. अत्यधिक लागत
B. सीमित उपयोग
C. कम लागत और उच्च सफलता
D. केवल प्रयोगात्मक प्रकृति
उत्तर (Answer) :
1 — C
2 — B
3 — B
4 — C
5 — C